1 देने का आनन्द, पाने के आनन्द से बड़ा है
2 भावना से कर्त्तव्य बड़ा होता है
3 हॅंसती-हॅंसती जिन्दगी ही सार्थक है
4 किसी को गलत मार्ग पर ले जाने वाली सलाह मत दों
5 वही काम करना ठीक है, जिसे करके पछताना न पड़े
6 समस्त संसार को मित्र की दृष्टि से देखों
7 जीवन में कभी भी अनुशासन का उल्लधंन न करे
8 जीवन का प्रत्येक क्षण एक सुअवसर है
9 ईश्वर तेरी इच्छापूर्ण हो, जीवन का हमारा यही मूलमंत्र है
10 अच्छा स्वास्थ्य एंव अच्छी समझ जीवन के दो सर्वोत्तम वरदान है
11 पुरूष से पुरूषोत्तम और नर से नारायण बनने का अभ्यास ही उपासना है
12 नारी का सम्मान हम सबका परम कर्त्तव्य है
13 जैसे-जैसे ज्ञानवान होते जाते है वैसे-वैसे हमारी उदारता बढ़ती जाती है
14 मानव की सबसे बड़ी शक्ति है- संकल्प शक्ति और सबसे बड़ा सहायक है आत्मविश्वास
15 जीवन की महत्ता उसे सही-सही जी लेने में सन्निहित है
16 ज्ञान की सार्थकता कर्म से जुड़ने पर ही है अन्यथा वह एक बोझा मात्र है
17 व्यसन मित्र् के रूप में शरीर मे घुसते और शत्रु बनक उसे मार डालते है
18 प्राणि मात्र के प्रति मैत्री जगाने वाला धर्म ही सच्ची धर्म है
19 अच्छे संकल्प करों, ताकि अच्छे मार्ग पर संभव हो सकें
20 विवेक पुर्वक सोचो, बोलो करो यही ईश्वर की सच्ची प्रार्थना है
21 अंतःकरण मे सोया देवत्व जगाऍं देवता बनें
22 सदैव आगे बढ़ने का नाम ही जीवन है
23 क्रांतियॉं तलवारों से नहीं आदर्शो (विचारों) से होती है
24 सफलता उन्ही को प्राप्त होती है जिनकी प्रवृति निश्चयात्मक होती है
25 सच्चा प्रयास कभी निष्फल नही होता है
26 अपनी जिदंगी में रोशनी के लिए किसी दुसरे की जिदंगी में अंधेरा मत करिये
27 र्इमान से बढ़कर कोई धन नहीं है
28 झुठ का सहारा लेकर अपनी जिदंगी को मत संवारियें
29 आलस्य एक प्रकार का हिंसा है
30 समय किसी की प्रतिज्ञा नहीं करते
31 वही उन्नति कर सकता है जो स्वयं अपने कों उपदेश देता है
32 शिक्षा ही एक ऐसी चीज है, जो हर जगह विखरी पड़ी है, यही एक चीज है, जिसे जो चाहे, जितना चाहे बटोर सकता है
33 बिना ठोकर खाए किसी की आंख नही खुलती
34 जब तक कष्ट रहने कों तैयार न होंगें, तुम्हें कुछ नहीं मिलेगी
35 हम सब साथ-साथ चले, समान वाणी वाले और समान मन विचार वाले हों
36 कमजोर आदमी हर काम कों असंभव समझना है और वीर हर असंभव कार्य कों साधारण समझता है
37 अनजान होना इतनी लज्जा की बात नही जितना सीखने के लिए तैयार न होना
38 जहॉं युक्ति और शक्ति दोनो से काम लिया जाता है, वहॉं सब और से सफलता मिलती है
39 संगठित ज्ञान का नाम ही विज्ञान है
40 पहले मार्ग को जानिए, फिर उस पर चलिए
41 अपने कर्त्तव्य पथ पर बढ़े चलना ही जीवन की सार्थकता
42 संयम और त्याग के रास्ते सें ही आनंद और शांति तक पहुचा जा सकता है
43 यह जिंदगी हंसते-खेलते हुए जीने के लिए है, चिंता, भय, शोक, क्रोध, निराशा, ईष्या, तृष्णा व वासना मे बिलखते रहना मूखर्ता है
44 हंसने की शक्ति ईश्वर के द्वारा मनुष्य को इसलिए दी गई है, क्योकि वह क्षणभर में अपने दुख-दर्द से युक्ति पा सके
45 उस दिन को बेकार समझो, जिस दिन तुम हंसे नही
46 पुस्तक पास मे हो,तो मित्रो की कमी नही खटकती है
47 सिर्फ पुस्तक पढ़ने से केछ नही सीखा नही जा सकता है, जब तक कि उन पर मनन न किया जाए
48 डरने वाला व्यक्ति स्वयं ही डरता है, उसको कोई डराता नही है
49 जो भविष्य की चिन्ता नही करता, वही वर्तमान का आनंद ले सकता है
50 डॉं पथ्य, डॉं शान्ति और आंनद संसार के सबसे बड़े डॉंक्टर है
51 आहार शुध्द होगा तो शरीर, वाणी, मन, और मस्तिष्ठ भी शुध्द होंगे
52 रोग का होना यह प्रकट करता है कि शरीर में विजातीय द्रव्य भर गया है
53 हंस मुख व्यक्ति खुद भी स्वस्थ रहते है और दूसरों को भी स्वस्थ रखते है
54 हमारा शरीर ईश्वर के मंदिर के समान है इसलिए इसे स्वस्थ रखना भी एक तरह से ईश्वर आराधना है
55 आत्मविश्वास सबसे बड़ा टॉनिक है
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