2011-12-07

पहली चिट्ठा के बारे में

अभी मैने हाल ही एक नया चिट्ठा शुरु किया है। अभी ये शुरुआत है.. मै अभी चिट्ठा लिखने का तरीका सीख रहा हुँ इस चिट्ठा में बहुत कुछ संशोधन की जरुरत है कुछ-कुछ लेख को कैटेगरी में बांटने की जरुरत है आने वाले नये साल में एक नया लुक के साथ सुधरा हुआ चिट्ठा आपके सामने आयेगा। इस चिट्ठा में कुछ जानकारियाँ पोस्ट की गई है ...आप पोस्ट की गई लेख के बारें में सुझाव या टिप्पणी भेजते रहे । ताकि अपने चिट्ठा को सुधारने में मद्द मिलेगी.... कम्प्यूटर विद्यार्थीयों के लिए इन्टरनेट और ई कामर्स के चार शीर्षक प्रकाशित किया गया है इसकी अगला शीषर्क नया साल में जारी कर दिया जायेगा । हर सप्ताह में पांच शीषर्क पोस्ट किया जायेगा । आई.टी. से अलग हटकर लेख प्रकाशित की जाईगी। धन्यवाद.................

04. What is Intranet ?


                  इन्टरनेट एक कम्प्यूटर नेटवर्क है जो किसी संगठन के लिए बनाया जाता है। यह इन्टनेट के समान प्रोटोकेल का use करता है। यह केन्द्रीयकृत सिस्टम का use करता है। संस्था में central location पर एक कम्प्यूटर होता है जो नेटवर्क से जुड़े अन्य कम्प्यूटर को नियन्त्रित करता है। इन्टरानेट एक Private Network है जो किसी एक संस्था या कम्पनी के लिए use होता है। इसका संरचना तथा कार्य प्रणाली इन्टरनेट के समान ही होता है। इन्टरानेट किसी एक इमारत से लेकर एक शहर या अन्य देशों में भी हो सकता है। इस नेटवर्क को उस organization के अनुमति से ही Access किया जा सकता है। इसमें communication Line के रुप में cable तथा Wireless Media का प्रयोग किया जा सकता है। इन्टरनेट, central location पर जो कम्प्यूटर होता है, उसे server कहते है। organization का मुख्य भाग या Department Server के द्वारा अन्य यूजर को नियंत्रित करते है। इसका rang भी इन्टरनेट की तरह world wide  हो सकता है। इसे कोई बाहरी यूजर आसानी से access  नही कर सकता। इन्टरनेट पर कुछ ऐसे नियम apply  किए जाते है। जिसकी वजह से बाहरी सूचना को use नही कर सकते। किसी आरग्नेशन के सूचना को इन्टरनेट के माध्यम से किसी दूसरे कम्प्यूटर या नेटवर्क में Transfer किया जा सकता है।

Internet और Intranet में मुख्य अन्तर
1. इन्टरनेट एक public Network है जबकि इन्टरानेट एक private Network सकता है।
2. इन्टरनेट से विश्व के सभी कम्प्यूटर आसानी से connect हो सकते है। लेकिन इन्टरानेट सिर्फ किसी संस्था के कम्प्यूटर को connect करता है।
3. इन्टरानेट में सूचना एक केन्द्रियकृत लोकेशन में स्टोर होते है लेकिन इन्टरनेट में सभी कम्प्यूटर के लिए बराबर सूचना उपलब्ध होते है।
4. इन्टरानेट में security समस्या नही आती है क्योकि इसमें संस्था के बाहर से कोई यूजर connect नही होता, इन्टरनेट में किसी भी नेटवर्क या यूजर के निजी कम्प्यूटर को connect किया जा सकता है इसलिए इन्टरनेट में विभिन्न प्रकार के virus आने का खतरा बना रहता है।
5. इन्टरनेट पर सभी प्रकार के वेबसाईट तथा फाईल को सर्च किया जा सकता है लेकिन  इन्टरानेट एक सीमित क्षेत्र में किसी सूचना या फाईल को सर्च करने की अनुमति देता है।

03. Protocol


Protocol
                      प्रोटोकोल वे Rules होते है जो combination के लिए apply किया जाते है। Device के बीच Transmission के लिए जिस way या path का use करता है। इसका निर्धारण प्रोटोकोल के द्वारा होता है। इन्टरनेट से कम्प्यूटर के बीच transmission  के लिए कुछ प्रोटोकोल्स का use किया जाता है जो अलग-अलग सर्विस प्रदान करते है। जो नेटर्वक से जुड़े हुए सभी कम्प्यूटर के बीच communication प्रदान करता है।
    Hardware Device के माध्यम से स्थानीयकरण करने के बाद जो सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है। वे प्रोटोकोल कहलाते है।
List Of Protocols
1. FTP (File Transfer Protocol)
2. HTTP (Hyper Text Transfer Protocol )
3. TELNET
4. GOPHER
5. TCP/IP (Transmission Control Protocol/ Internet Protocol)

1. FTP (File Transfer Protocol):- यह एक Protocol  है जो इन्टरनेट के माध्यम से दो कम्प्यूटर के बीच फाईल को स्थान्तरण करवाता है। फाईल के एक एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम में Transfer  होती है। उन्हे FTP Server कहते है। क्योकि यह File Transfer करने की सुविधा प्रदान करते है। file Transfer दो प्रकार के होते हैः-  (a) ASCII- अस्की का use  सिर्फ text को transfer करने के लिए किया जाता है।    (b) Binary- बायनरी का प्रयोग करके text के अलावा अन्य object  को भी transfer किया जा सकता है।
2. HTTP (Hyper Text Transfer Protocol ):- इसका use किसी वेबसाईट को अपने सिस्टम से connect  करने के लिए किया जाता है। वेबसाईट में जो text type किए जाते है, वे hyper text कहलाते है। Hyper text को एक मशीन से दूसरे मशीन में भेजने के लिए जिस प्रोटोकोल का use किया जाता है। वेबपेज वेबसाईट का समूह होता है जो एक special language में लिखे जाते है। जिसे HTML कहते है। इन HTML page को किसी server की site  से अपने कम्प्यूटर सिस्टम  load किया जा सकता है। इसी प्रकिया को hyper transfer text कहते है। इन्टरनेट पर जब किसी वेबसाईट को open किया जाता है तो उस वेबसाईट के नाम के सामने अपने आप HTTP लिखा हुआ प्रदर्शित हो जाता है।
3. TELNET :- यह प्रोटोकोल यूजर को Remote Computer से connect करने में सहायक होता है। Remote  Computer Internet से जुड़े वे कम्प्यूटर होते है जो अधिक दूरी होने पर connect होते है। Telnet वह सर्विस है जो यूजर के अन्य कम्पयूटर पर पहुचाकर उसमें उपलब्ध सर्विस को use करने के सुविधा प्रदान करते है। Telnet पर कार्य करते समय user name और password की आवश्यकता पड़ती है। ये दोनो नाम सही होने पर यूजर Remote Computer से connect  हो जाता है। Telnet के माध्यम से यूजर विश्व के सभी प्रकार लाईब्रेरी, डेटाबेस, तथा अन्य सार्वजनिक सेवाओ का use कर सकता है।
4. GOPHER:- यह एक इन्टरनेट प्रोटोकोल है जो इन्टरनेट पर सूचना को Transmit करने का कार्य करता है। यह एक यूजर फ्रेण्डली इन्टरफेस प्रदान करता है। ये यूजर के द्वारा Request किये गये सभी सूचना को मानीटर स्क्रीन पर प्रदर्शित करता है। यह एक से अधिक इन्टरनेट सर्विस को आपस में connect करने की सुविधा देता है।
5. TCP:- यह प्रोटोकोल इन्टरनेट पर विभिन्न कम्प्यूटर के बीच सूचना के Transfer को नियन्त्रित करता है। यह communication  को भी नियन्त्रित करता है। communication के बीच में किसी प्रकार का दूरी होने पर नेटर्वक व्यस्त हो जाता है। इस स्थिति को TCP के द्वारा Handle किया जाता है। यह निर्धारित करता है कि सूचना को किस पाथ से Transfer किया जाए।
 
5. IP:- प्रत्येक सिस्टम में एक IP Address होता है जो उसे नेटवर्क में पहचान देने के लिए दिया जाता है। ताकि जिस स्थान से कम्प्यूटर आपरेट किया जा रहा है उस स्थान का नाम पता लगाने के लिए इस Address का प्रयोग किया जाता है। इन्टरनेट एक बड़ा नेटवर्क होता है। जिसमें सभी कम्प्यूटर के बीच Transmission के लिए सबसे महत्तवपूर्ण प्रोटोकोल TCP/IP है। IP Address का अर्थ उस नम्बर से होता है जो नेटवर्किंग के समय प्रत्येक सिस्टम को दिया जाता है। Internet Communication के लिए इसी IP Address  का प्रयोग किया जाता है।


02. Concept of Internet (Terminology)


Internet:- इन्टरनेट एक से अधिक कम्प्यूटर का नेटर्वक होता है। इसमें विश्व के सभी कम्प्यूटर एक-दूसरे से जुड़े होते है। इन्टरनेट में सभी user एक-दूसरे के साथ communicate  कर सकते है। इसमें जुड़े सभी कम्प्यूटर filed तथा अन्य Resources को आपस में शेयर कर सकते है।
Intranet:- किसी एक संगठन में जो LAN बनाया जाता है उसका इन्टरनेट का connection intranet कहलाता है। यह सिर्फ एक ही संगठन तक सीमित रहता है जबकि इन्टरनेट विश्वव्यापी या world wide होता है।
Website:- यह इन्टरनेट पर खुलने वाली एक फाईल होती है। कोई website, webpage का समूह होता है। Webpage को जिस भाषा में बनाया जाता है। उसे HTML कहा जाता है। Website किसी भी कम्पनी का web address होता है जो इन्टरनेट पर खुला होता है।
Example:- www.microsoft.com
                  www.mcu.ac.in
 
HTML:- Hyper Text Markup Language है। किसी भी webpage को डिजाईन करने के लिए जिस भाषा का प्रयोग करते है। उसे HTML कहते है। webpage बनाने वाले विशेषशज्ञ को webpage designer कहा जाता है।
HTTP:- Hyper Text Transfer Protocol इन्टरनेट पर किसी website को connect करने के लिए जिस प्रोटोकोल का use किया जाता है इसे HTTP कहते है।
Web Browser : - ऐसे सॉफ्टवेयर होते है जो इन्टरनेट पर website को open करने के लिए use किए जाते है इन्टरनेट पर किसी भी प्रोग्राम को Run करने के लिए web browser का होना आवश्यक है।
  उदाहरणः– 1. Microsoft Internet Explorer
           2. Netscape Navigator 
           3. Mozilla Fireworks
           4. Google Chrome
ISP:- Internet Service Provider ऐसे website जो यूजर को free email service प्रदान करते है। ISP कहलाते है। ये website यूजर को कुछ space प्रदान करते है। जिसका use email भेजने तथा प्राप्त करने के लिए किया जाता है इसके अतरिक्त अपना email Save  भी कर सकते है। 
  उदाहरणः– www.google.com
                  www.yahoo.com
                  www.rediff.com
                  www.hotmail.com
WWW:- इन्टरनेट एक public नेटर्वक है। जो पूरे विश्व में फैला है। किसी भी website का नाम www से शुरु होता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि website विश्व के किसी कम्प्यूटर को access किया जाता है।
Email:- यह एक इन्टरनेट द्वारा प्रदान की गई ऐसी सुविधा है जिसकी सहायता से एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर में मैसैज भेज तथा प्रेषित कर सकते है। Email के द्वारा भी text, Image, Audio तथा Graphics फाईल को Transfer  किया जा सकता है।
Web Address:- प्रत्येक यूजर एक सिस्टम  में रहकर दूसरे सिस्टम में संदेश भेजने के लिए एक address की आवश्यकता पड़ती है। उसे Email Address कहते है।
Hyperlink:- किसी भी object या sentence को लिंक किया जाता है तो इस स्थिति को Hyperlink कहा जाता है। इन्टरनेट पर एक webpage में एक page से दूसरे page में जाने के लिए Hyperlink का use किया जाता है।
Surfing:- इन्टरनेट पर एक website  से दूसरे website में  जाने की प्रक्रिया को surfing कहा जाता है। यूजर एक ही समय पर एक से अधिक webpage surfing कर सकता है।
Chatting:- इस प्रक्रिया में इन्टरनेट से जुड़े सभी यूजर एक-दूसरे को मैसेज भेज सकते है तथा बातचीत कर सकते है।
Search Engine:- Search Engine ऐसे website  होते है। जहाँ पर किसी भी टॉपिक या उससे संम्बंधित  website में ढुढा जा सकता है। इसके लिए टॉपिक के नाम टाईप कर search Button को क्लिक करना होता है।
    उदाहरणः– www.google.com
                    www.yahoo.com

01. Evolution of Internet

Internet Computer network का एक ऐसा network है, जो इन्टरनेट में सभी कम्प्यूटर एक-दूसरे से communicate कर सकते है। Internet एक public नेटर्वक है। जिसे विश्व के सभी कम्प्यूटर access कर सकते है। इन्टरनेट world wide web पर आधारित होता है। इन्टरनेट का विकसित रुप ARPANET( Advanced Research Project Agency Network) है।
    सन् 1962 में अमेरिका और रुस के बीच शीतयुध्द का माहौल था। उसी समय में अमेरिका ने एक एजेन्सी से विकसित किया, जिसका नाम ARPA रखा गया । इसका मुख्य तात्पर्य गोपनीयता से सम्बंधित सूचना को सुरक्षित ढंग से transfer करना था। सबसे पहले अमेरिका के दो विश्वद्यालय के बीच चार कम्प्यूटर को जोड़कर एक नेटर्वक बनाया गया। इसे AlterNet का नाम दिया गया। सन् 1962 से सन् 1969 तक इस नेटर्वक से वे सभी कम्प्यूटर जुड़ते चले गये। जिनका use अमेरिका की Research एजेन्सी करती थी। इस नेटर्वक में जो सबसे ज्यादा उपयोगी सर्विस थी। उसका नाम E-mail था।
    सन् 1962 के बाद सिस्टम का प्रयोग बिजनेस तथा कार्मस के क्षेत्र में होने लगा। यह आम नागरिकों के बीच लोकप्रिय होने लगा। AlterNet का नाम आगे चलकर Internet हुआ। इन्टरनेट के पूरी तरह नागरिकीकरण होने से पहले यह दो भागों में बंटा हुआ था। एक भाग से ARPANET था जिसे अमेरिका के सुरक्षा एजेन्सी लोग प्रयोग करते है। ये इन्टरनेट सिर्फ आम नागरिकों के लिए उपलब्ध था। इन्टरनेट पर किसी एक अकेले व्यक्ति पर निर्भर नही होता। इससे जुड़कर सभी यूजर किसी भी सूचना को प्राप्त कर सकता है। कम्प्यूटर सिस्टम में communicate कर सकते है। कैलोफोनिया के विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. लिनार्ड डिर्नाक ने इन्टरनेट का प्रयोग word wide web  के रुप में सन् 1980 से प्रगति की। इस कालखण्ड में इन्टरनेट के लिए webpage का डिजाईन HTML तथा अन्य लिंक पेज को आपस में connect  करने के लिए Hyperlink Technology का use किया गया ।
    सन् 1980 में एक छोटा-सा कम्प्यूटर प्रोग्राम लिया गया जिसकी सहायता से कम्प्यूटर में store document  को आपस में connect किया जाता है। इन्टरनेट के द्वारा अलग-अलग कम्प्यूटर के बीच document को जोड़ने के लिए प्रोग्राम का use  किया जाता है। इस प्रोग्राम के जनक डॉ. थिम्वेनपेयर ली थे। ARPANET का use सिर्फ सुरक्षा एजेन्सी के लिए किया गया था। आज यह इन्टरनेट के माध्यम से समाचार मंनोरंजन, कार्मस तथा टेली communication के क्षेत्र में सबसे अधिक उपयोग हो रह है। इन्टरनेट पर new group एक ऐसा साधन है, जो जिस पर विभिन्न विषयों पर चर्चा किया जा सकता है। सभी क्षेत्र से सम्बंधित सूचना प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही अपने द्वारा लिखे गए मैसेज को स्थान्तरित किए जा सकते है।

हिन्दी में वैब साइट्स की एक सूची


अक्सर हिन्दी मे इंटरनेट पर क्या-क्या सामग्री है ये लोगों को मालूम नहीं होता है। यहाँ पर हम हिन्दी के मकड़ जालों (वैब साइट्स) की एक सूची तैयार कर रहे हैं। हमारे अनुमान से कई सालों बाद जब हिन्दी मे लाखों मकड़ जाल चालू हो जायेंगे तब इस सूची का कोई महत्व नही रह जायेगा। हम आशा करते हैं कि वो दिन जल्द आये।
ग़ौरतलब है कि इनमें से कई मकड़ जालों पर की गयी लिखायी में यूनिकोड मानक का प्रयोग नहीं किया गया है। इस वजह से इन साइटों का लेखन एक स्थान से दूसरे स्थान पे ले जाने में दिक्कत होती है परंतु पिछले कुछ सालों मे दुनिया के अग्रणी कम्प्यूटर वैज्ञानिकों ने और बड़ी कम्प्यूटर कम्पनियों ने एक अंतर-राष्ट्रीय मानक का इजाद किया है जिसे यूनिकोड कहते है । भविष्य मे हिन्दी मे सभी काम यूनिकोड में ही होगा। नॉन-यूनिकोड फॉंट के लेखों को यूनिकोड मे बदलने के लिये कई मुफ्त औजार मौजूद है। जैसे माइक्रोसॉफ्ट का इंडिक फॉंट ट्रांस्लिटरेशन (लिप्यंतरण) टूल - टिबिल। ज़्यादा जानकारी के लिये देखें - टिबिल
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